मुंह की बात सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन
आवाजों के बाज़ारों में खामोशी पहचाने कौन
सदियों सदियों वही तमाशा, रास्ता रास्ता लम्बी खोज (??)
लेकिन जब हम मिल जाते हैं, खो जाता है जाने कौन
वोह मेरा आइना है या मैं उस कि परछाई हूँ
मेरे ही घर में रहता है, मुझ जैसा ही जाने कौन
किरण किरण अलसाता सूरज, पलक पलक खुलती नींदें
धीमे धीमे पिघल रहा है, ज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन
May 11, 2011
February 06, 2011
फिर वही हम हैं..
कुछ यूँ होता कि...
बहार आती.गुलों में रंग भरते ,तुम आते
और फिर इसका नाम प्यार होता
कुछ यूँ होता की तुम्हें प्यार होता
जज्बातों का क़त्ल होता,दिल टूटते,बेवफाई होती..
...और फिर इसका नाम प्यार होता
कुछ यूँ होता की तुम्हें प्यार होता
चाहत बदलती,रिश्ते बदलते,कोई गुनाहगार होता..
और फिर इसका नाम प्यार होता
कुछ यूँ होता की तुम्हें प्यार होता
क़यामत आती,तेरी एक शाम हमारे नाम होती.
और फिर इसका नाम प्यार होता..
कुछ यूँ होता की तुम्हें प्यार होता..
अब तेरी बारी है..
अन्य कवितायेँ
यूँकि यहाँ पर शामिल कवितायेँ नामचीन कवियों की है, लेकिन अब कुछ अन्य कवितायेँ शामिल कर रहा हूँ जो मुझे बहुत पसंद आया है और आशा है आप लोग भी सराहे बगैर नहीं रह पाएंगे...
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